चंडीगढ़, 24 अप्रैल – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसानों के लिए जो भी योजना बनाई जाएं, उनका सरलीकरण होना चाहिए। किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं होनी चाहिए। डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया में जो भी दिक्कत आई है, उन समस्याओं का निदान होना चाहिए।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को सचिवालय में ई क्षतिपूर्ति के संबंध में समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं राजस्व एवं आपदा प्रबंधन वित्त आयुक्त डॉ सुमिता मिश्रा, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ यशपाल सिंह, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग आयुक्त एवं सचिव श्री जे गणेशन, कृषि विभाग के महानिदेशक श्री राज नारायण कौशिक भी मौजूद थे।
बैठक के दौरान प्रदेश सरकार ने खरीफ 2025 फसल मुआवजा योजना के तहत 370.52 करोड़ रुपए जारी करने की मंजूरी भी दी है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा स्वीकृत इस निर्णय से राज्यभर के 1.5 लाख से अधिक किसानों के खातों में सीधे राशि स्थानांतरित की जाएगी।
यह स्वीकृत राशि उन दावों से संबंधित है, जो तकनीकी जांच के कारण पहले लंबित रखे गए थे, जिनमें डुप्लीकेट या समान फोटोग्राफिक साक्ष्य वाले मामले भी शामिल थे। मुआवजा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के माध्यम से जारी किया जा रहा है, जो ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ प्रणाली से एकीकृत एक पारदर्शी और किसान-अनुकूल डिजिटल प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म पंजीकरण, सत्यापन से लेकर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) तक पूरी प्रक्रिया का डिजिटलीकरण सुनिश्चित करता है, जिससे सटीकता, जवाबदेही और गति बनी रहती है।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने बताया कि पहले चरण में सरकार ने 10 दिसंबर 2025 को 53,821 किसानों को 116.15 करोड़ रुपए जारी किए थे। अब 370.52 करोड़ रुपए की नई मंजूरी के साथ शेष 1.5 लाख से अधिक किसानों को यह राशि मिलेगी।
अधिकारियों ने बताया कि पोर्टल पर आवेदन करने के बाद इस प्रणाली ने 5,500 से अधिक संदिग्ध प्रविष्टियों सहित अपात्र और फर्जी दावों को सफलतापूर्वक छांट दिया है, जिससे सार्वजनिक धन की सुरक्षा के साथ वास्तविक लाभार्थियों को उनका हक मिल सके।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने विभागों को निर्देश दिए हैं कि मुआवजा राशि का भुगतान जल्द से जल्द किसानों के बैंक खातों में सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों के साथ मजबूती से खड़े रहने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
*मुरब्बा लेवल तक हुई जियो-रेफरेंसिंग प्रक्रिया*
बैठक के दौरान अधिकारियों ने कहा कि एग्रीस्टैक और जियो-रेफरेंस्ड वेरिफिकेशन जैसी उन्नत डिजिटल तकनीकों के उपयोग से हरियाणा कृषि क्षेत्र में आपदा राहत प्रबंधन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा में जियो-रेफरेंसिंग प्रक्रिया को मुरब्बा स्तर तक लागू किया जा चुका है। इसके अंतर्गत प्रत्येक खेत/मुरब्बे की सटीक लोकेशन दर्ज की गई है, जिससे भूमि का स्पष्ट और प्रमाणिक रिकॉर्ड तैयार हुआ है। इस प्रणाली के माध्यम से फसल का प्रकार, क्षेत्रफल और वास्तविक स्थिति का डेटा पारदर्शी तरीके से उपलब्ध हो रहा है। इस पहल से फसल निगरानी, नुकसान के आकलन तथा सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लाभ होगा। अधिकारियों ने बताया कि जियो-रेफरेंसिंग के कारण सही लाभार्थियों की पहचान आसान होगी, साथ ही गलत दावों में कमी आएगी और प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी।







