रोहतक, 23 मई। जिला के ब्लॉक कलानौर व गांव जिंदरान के किसानों ने ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर जलमग्न हुई फसलों का मुआवजा लेने के लिए आवेदन किया था। लेकिन मुआवजा नहीं मिला तो किसानों ने कोर्ट का सहारा लिया। एडवोकेट जसबीर सिंह बजाड़ व एडवोकेट परमवीर सिंह दून ने किसानों की तरफ से पैरवी करते हुए हाई कोर्ट में मजबूती के साथ अपना पक्ष रखा और किसानों के हक में फैसला करवाया।
एडवोकेट जसबीर सिंह बजाड़ ने बताया कि 2025 में भारी बारिश के कारण कृषि क्षेत्रों में जलभराव हो गया था, जिसके कारण खेतों में पानी भर गया। पानी भरने के कारण फसल नष्ट हो गई, जिसके मुआवजे के लिए आवेदन किया। लेकिन किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली, इसी को लेकर सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट में केस दर्ज करवाया गया, जो अब जीत गए है।
एडवोकेट जसबीर सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में फसलों के नुकसान का सर्वेक्षण करने के लिए एक टीम गठित करने व कलानौर और गांव जिंदरान के प्रभावित क्षेत्र की तत्काल गिरदावरी करवाकर प्रति एकड़ न्यूनतम 15 हजार रुपए मुआवजा देने के निर्देश दिए है।
एडवोकेट जसबीर सिंह व एडवोकेट परमवीर सिंह दून ने बताया कि कोर्ट में अपने जवाब में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव अधिवक्ता सवनील जसवाल ने 21 मई को लगी तारीख में बताया कि राजस्व अधिकारियों ने सर्वेक्षण कर लिया है और अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंप दी है। किसानों के लिए 370 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत हो चुकी है, जो चार सप्ताह में जारी करने के निर्देश दिए है।
एडवोकेट जसबीर सिंह बजाड़ ने बताया कि हाई कोर्ट ने किसानों की मांग पर खेतों से पानी निकालने के लिए जिला प्रशासन को 2 माह का समय दिया है। अगर दो माह में खेतों से पानी नहीं निकला तो किसान दोबारा कोर्ट में शिकायत कर सकते है। इसके साथ अन्य मामले में निपटाने के निर्देश दिए है।





