
देश और प्रदेश में ऐसे अनगिनत मामले होंगे जिसमें जरुरतमंदों को सिस्टम से लड़ाई के बाद हक़ मिला है. हरियाण के रेवाड़ी का ऐसा ही एक मामला सामने आया है. जहाँ जरूरतमंद दंपत्ति ने सरकारी कार्यालयों के खूब चक्कर लगाये लेकिन उन्हें मदद मिलना तो दूर वो हक़ भी नहीं मिला जो सरकार की योजनाओं के तहत उन्हें मिलना चाहिए था. जिसके बाद समाजसेवी एडवोकेट कैलाशचंद की मदद से सबंधित अधिकारियों को शिकायत की गई. जिसके बाद भी करीबन आठ महीने तक सिस्टम लड़ाई जारी रखी गई और जरूरतमंद दंपति को उनका हक़ मिला है.
आपको बता दें कि गांव गोठड़ा जिला रेवाड़ी निवासी परमेन्द्र कुमार काफी वर्षों से ब्रेन ट्यूमर बीमारी से ग्रस्त थे, जिसका एम्स दिल्ली में वर्ष 2019 में ब्रेन ट्यूमर का ऑपरेशन किया गया था . ऑपरेशन के दौरान गले में समस्या हो गई थी , फिर गले का ऑपरेशन भी ऑपरेशन किया गया था, तीन महीने तक एम्स में दाखिल रहने के बाद परमेंद्र कुमार दिमाकी रूप से निष्क्रिय हो गए और दोनों आंखों से दिखना भी बन्द हो गया था, परमेंद्र कुमार की बीमारी के कारण परिवार को रोजी -रोटी की समस्या भी खड़ी हो गई , क्योकि पूरा परिवार परमेंद्र द्वारा मजदूरी से मिलने वाले पैसों पर ही निर्भर था.

जिसके बाद परमेन्द्र की पत्नी ने वर्ष 2020 में बीपीएल राशन कार्ड बनवाने और पेंशन बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों में जाकर कोशिश शुरू की थी. लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई. जिसके बाद समाजसेवी कैलाश चंद एड्वोकेट के सम्पर्क में पीड़ित आयें तो सबसे पहले परमेंद्र का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाया गया.
अब करीबन आठ महीने बाद जरूरतमंद दंपति की पेंशन और बीपीएल राशन कार्ड बन पाया है. इसी तरफ से बस पास और रेल बस के लिए भी प्रकिया जारी है. इस केस से आपक सहज समझ सकते है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी किस कदर लोगों को धक्के खाने पर पड़ रहे है.











