हिसार, 24 जून।
जब देश और समाज नशे जैसी गंभीर चुनौती से जूझ रहा है, ऐसे समय में हरियाणा के हांसी क्षेत्र के एक युवा ने अपने संकल्प, समर्पण और सामाजिक चेतना के बल पर एक ऐसा जनआंदोलन खड़ा कर दिया, जो आज लाखों युवाओं के जीवन को नई दिशा दे रहा है। गांव कुतुबपुर निवासी युवा सामाजिक कार्यकर्ता राहुल शर्मा पिछले कई वर्षों से नशा मुक्ति की अलख जगा रहे हैं और अब तक 400 से अधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लाखों युवाओं को नशा न करने की शपथ दिला चुके हैं।
राहुल शर्मा की यह यात्रा किसी सरकारी अभियान से नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी संवेदनशील सोच और सेवा भावना से शुरू हुई। फार्मेसी शिक्षा के दौरान सिविल अस्पताल हिसार में प्रशिक्षण प्राप्त करते समय उन्होंने नशे के कारण बर्बाद होते युवाओं और टूटते परिवारों को करीब से देखा। यही अनुभव उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। बाद में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से समाजकार्य की पढ़ाई ने उनके भीतर समाज परिवर्तन का जज्बा और मजबूत कर दिया।
राहुल बताते हैं कि उन्हें अपने मामा अनिल शर्मा, शिक्षक प्रो. बलकार सिंह पुनिया और शिक्षिका अमरजीत कौर से समाज सेवा की प्रेरणा मिली। इसी प्रेरणा ने उन्हें नशा मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने गांव कुतुबपुर से जागरूकता अभियान की शुरुआत की। शुरुआत में यह प्रयास छोटा था, लेकिन धीरे-धीरे युवाओं का कारवां जुड़ता गया और अभियान गांवों, स्कूलों, कॉलेजों तथा शहरों तक फैल गया।
उनके प्रयासों का असर इतना व्यापक रहा कि प्रशासन ने भी उनके कार्यों को सराहा। उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें एसडीएम हांसी द्वारा सम्मानित किया गया। इसके बाद उन्होंने हरियाणा सरकार की विभिन्न योजनाओं में ब्लॉक कोऑर्डिनेटर के रूप में कार्य करते हुए समाज सेवा के क्षेत्र में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। नशा मुक्ति के साथ-साथ जल संरक्षण, स्वच्छता, सड़क सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अनेक अभियानों का सफल संचालन किया।
वर्ष 2019 में स्वास्थ्य विभाग में जिला सुकून काउंसलर के पद पर चयनित होने के बाद भी उनका सामाजिक अभियान नहीं रुका। नियमित सरकारी दायित्वों के साथ-साथ उन्होंने नशा मुक्ति को अपना मिशन बनाए रखा। उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए वर्ष 2020 में हरियाणा सरकार ने उन्हें राज्य स्तरीय सम्मान से नवाजा। बाद में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के नशा मुक्त भारत अभियान में उन्हें मास्टर वॉलंटियर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
आज राहुल शर्मा केवल हिसार या हांसी तक सीमित नहीं हैं। वे पूरे हरियाणा में युवाओं और आमजन को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक कर रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, ग्राम सभाओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से वे लगातार लोगों तक पहुंच रहे हैं। उनके कार्यक्रमों में युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिलती है और हजारों युवा नशे से दूर रहने का संकल्प लेते हैं।
उनकी कार्यशैली और सामाजिक प्रतिबद्धता को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा प्रकाशित एक शोध पुस्तक में उन्हें “द रियल चेंज मेकर” के रूप में स्थान दिया गया। इसके अलावा केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी उन्हें अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया। राहुल शर्मा का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि परिवार, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और युवा मिलकर प्रयास करें तो नशा मुक्त समाज का सपना जल्द साकार हो सकता है। वे सरकार को सुझाव देते हैं कि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर नशा मुक्ति मित्र या काउंसलर की नियुक्ति की जाए, गांवों में खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, निशुल्क नशा मुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं को नशा विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका दी जाए।
आज राहुल शर्मा की पहचान केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि उस युवा परिवर्तनकारी चेहरे के रूप में बन चुकी है जिसने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे मजबूत हों तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उनकी मुहिम से प्रेरित होकर अनेक युवा स्वयं अपने क्षेत्रों में नशा विरोधी अभियान चला रहे हैं। यही राहुल शर्मा की सबसे बड़ी उपलब्धि है और यही उनके अभियान की वास्तविक सफलता भी।





