Haryana News: हरियाणा सरकार ने हाई टेंशन बिजली लाइनों और ट्रांसमिशन टावरों से प्रभावित किसानों को बड़ी राहत देते हुए नई मुआवजा नीति लागू कर दी है। इस नीति के तहत अब किसानों को पहले की तुलना में कहीं अधिक मुआवजा मिलेगा।
नई नीति के अनुसार, 66 केवी या उससे अधिक क्षमता की बिजली लाइनों के कारण यदि किसानों की जमीन पर टावर लगाए जाते हैं, तो उन्हें जमीन के कलेक्टर गाइडलाइन रेट का 200 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जाएगा।
टावर के आसपास की अतिरिक्त जमीन भी मुआवजे में शामिल
सरकार ने मुआवजा दायरा बढ़ाते हुए टावर के बेस एरिया के साथ-साथ चारों ओर एक-एक मीटर अतिरिक्त भूमि को भी मुआवजे में शामिल किया है। इससे किसानों को अधिक क्षेत्र का लाभ मिलेगा।
पहले से कहीं ज्यादा होगी मुआवजा राशि
नई व्यवस्था के लागू होने से किसानों को मिलने वाली मुआवजा राशि पहले की तुलना में काफी अधिक हो गई है। इससे बिजली परियोजनाओं के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई बेहतर तरीके से हो सकेगी।
फसल नुकसान का पैसा सीधे किसान के खाते में
नई मुआवजा नीति के तहत फसल क्षति का भुगतान सीधे किसान के बैंक खाते में किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर लाभ मिलेगा।
पटवारी या राजस्व अधिकारी का प्रमाण पत्र होगा जरूरी
फसल नुकसान के मुआवजे के लिए संबंधित पटवारी या राजस्व अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इस प्रमाण पत्र में किसान का नाम, प्रभावित क्षेत्र, फसल का प्रकार, अनुमानित उपज और फसल का मूल्य दर्ज होगा।
30 जनवरी 2026 को जारी हुआ आधिकारिक नोटिफिकेशन
हरियाणा सरकार के ऊर्जा विभाग ने 30 जनवरी 2026 को “66 केवी और उससे अधिक इन्ट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन लाइनों के लिए फसल नुकसान मुआवजा नीति” का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया।
सभी नई ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं पर लागू होगी नीति
यह नीति राज्य में लागू होने वाली सभी नई ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं पर प्रभावी होगी। इसमें सरकारी और निजी दोनों एजेंसियां शामिल होंगी।
HVPNL और पावर ग्रिड जैसी एजेंसियां भी दायरे में
नई नीति के अंतर्गत हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड (HVPNL),पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (PGCIL) सहित अन्य सरकारी व निजी कंपनियां आएंगी।






