वरिष्ठ कांग्रेस नेता विक्रम कादयान ने कहा कि कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीईटी) परीक्षा में सामने आई गंभीर खामियों ने लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत और प्रतिभा के साथ मजाक किया है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के ज्ञान, क्षमता और कौशल का निष्पक्ष मूल्यांकन करने का माध्यम होती हैं, लेकिन प्रश्नपत्र में कोड नंबर संबंधी त्रुटियां, भाषा अनुवाद की गलतियां तथा अस्पष्ट प्रश्नों ने पूरी परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
कादयान ने कहा कि कई प्रश्नों में अनुवाद संबंधी गंभीर त्रुटियां थीं, जबकि कुछ प्रश्न इतने द्विअर्थी थे कि अभ्यर्थी पूरे समय भ्रम की स्थिति में रहे। उन्होंने कहा कि एक प्रश्न में तो मुहावरा दिए बिना ही उसका अर्थ पूछ लिया गया, जो परीक्षा संचालन में घोर लापरवाही का उदाहरण है। ऐसी गलतियां युवाओं का आत्मविश्वास कमजोर करती हैं और निष्पक्ष प्रतियोगिता की भावना को ठेस पहुंचाती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार सृजन के प्रति गंभीर नहीं है। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों, कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में हजारों पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं, जिससे प्रशासनिक कार्य, शिक्षा व्यवस्था और जनसेवाएं प्रभावित हो रही हैं। विश्वविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा की गुणवत्ता और शोध कार्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
विक्रम कादयान ने कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद शिक्षा का निजीकरण लगातार बढ़ा है, जिससे गुणवत्तापूर्ण सार्वजनिक शिक्षा कमजोर हुई है और योग्य शिक्षकों के शोषण की स्थिति बनी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकारी शिक्षण संस्थानों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तथा रिक्त पदों पर शीघ्र स्थायी नियुक्तियां की जाएं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी छात्रों और युवाओं के रोजगार के अधिकार की लड़ाई लगातार लड़ती रही है। “छात्रों की गूंज” अभियान के माध्यम से युवाओं की समस्याओं और आवाज को मजबूती से उठाया जा रहा है। कादयान ने कहा कि कांग्रेस युवाओं और आम जनता के साथ मिलकर रोजगार विरोधी नीतियों तथा प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगी।





