हरियाणा के सरकारी डॉक्टरों के लिए पीजी बॉन्ड पॉलिसी में किया बदलाव -डॉ. सुमिता मिश्रा

By Sahab Ram
On: June 2, 2026 9:13 PM
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चंडीगढ़, 2 जून – हरियाणा सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की कमी को दूर करने और अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की लगातार मौजूदगी  सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सर्विस के दौरान पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन कर रहे डॉक्टरों के लिए पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है।

यह जानकारी देते हुए हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर, मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च विभाग की ओर से जारी की गई बदली हुई पॉलिसी के तहत जो डॉक्टर सरकारी सर्विस में रहते हुए क्लीनिकल स्पेशलिटी में पोस्टग्रेजुएट डिग्री कर लेते हैैं। अब उन्हें मेडिकल एजुकेशन बॉन्ड भरने की ज़रूरत नहीं होगी, और वे अपने मूल विभाग में काम करते रहेंगे। इस निर्णय से पूरे हरियाणा में स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर सेवाएं मजबूत होने की उम्मीद है। हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में मौजूदा रिज़र्वेशन कोटे के तहत सेवा के दौरान पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को बढ़ावा देने से जुड़ी सरकार की 2022 पॉलिसी के नियमों में बदलाव किया गया है।

नई पॉलिसी अनुसार नॉन-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल स्पेशलिस्ट के लिए तीन साल की टीचिंग सर्विस केे दौरान जो डॉक्टर राज्य के मेडिकल कॉलेजों में रिज़र्वेशन का फ़ायदा उठाकर प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल विषय में पोस्टग्रेजुएट कोर्स पूरा कर लेते हैं, उन्हें मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च डिपार्टमेंट के तहत मेडिकल एजुकेशन इंस्टीट्यूशन में तीन साल तक काम करना होगा।

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इन डॉक्टरों को मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च डिपार्टमेंट में निर्धारित समय पूरा करने के बाद स्थाई तौर पर शामिल होने का ऑप्शन दिया जाएगा, जिससे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में टीचिंग फैकल्टी बढाने का स्पेशल रास्ता बनेगा।

हरियाणा ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के साथ मेडिकल एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से बढ़ाया जा रहा है, जिससे एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी जैसे विषय में योग्य टीचरों की मांग बढ़ गई है। पॉलिसी की सबसे खास बात यह है कि क्लीनिकल में पोस्टग्रेजुएट पढ़ाई करने वाले डॉक्टरों को छूट दी गई है। ऐसे डॉक्टरों को हरियाणा सिविल डेंटल सर्विस मेडिकल एजुकेशन बॉन्ड भरने की ज़रूरत नहीं होगी और वे अपनी हायर स्टडी पूरी करने के बाद अपने मूल विभाग में सर्विस जारी रख सकेंगे।

इस निर्णय से यह सुनिष्चित होगा कि सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट मैनपावर बनाए रखने में मदद मिलेगी और पब्लिक हेल्थकेयर संस्थानों को योग्य डॉक्टरों की कमी का सामना नही करना पड़ेगा।

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डॉ. मिश्रा ने कहा कि बदली हुई पोलिसी में दो आवश्यक प्रबंधो के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है जिसमें मेडिकल कॉलेजों में क्वालिफाइड फैकल्टी की बढ़ती मांग को पूरा करना और अस्पतालों में स्पेशलिस्ट मेडिकल सर्विस को बनाए रखना है।

सरकार को उम्मीद है कि नॉन-क्लीनिकल पोस्टग्रेजुएट को टीचिंग संस्थानों की ओर भेजने और क्लीनिकल स्पेशलिस्ट को हेल्थकेयर सर्विस में बने रहने की इजाज़त देने से मेडिकल एजुकेशन और मरीज़ों की देखभाल दोनों एक साथ मज़बूत होंगी। 

पॉलिसी में यह बदलाव इसलिए किया गया है कि हरियाणा अपने मेडिकल एजुकेशन नेटवर्क बढ़ाने में बड़ा निवेष कर रहा है। हाल ही में कई नए सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं, जिससे नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों को पूरा करने और मेडिकल एजुकेशन की क्वालिटी में सुधार के लिए ट्रेंड फैकल्टी सदस्यों की तुरंत ज़रूरत हो गई है। नई पॉलिसी से जिला और तीसरे स्तर के हॉस्पिटल में स्पेशलिस्ट हेल्थकेयर सर्विस पर बिना असर डाले एकेडमिक प्रोफेशनल्स का एक स्थाई पूल बनाने में मदद मिल सकती है।

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Sahab Ram

हरियाणा मीडिया में पिछले 14 सालों से सक्रिय। Yuva Haryana, Khabar Fast, STV Haryana News, खबरें अभी तक, A1 Tehelka में अपनी सेवाएं दी। चौपाल टीवी डिजिटल मीडिया के संस्थापक ।

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