किसी भी प्रकार की आपदा के समय लोगों को बचाने के लिए हमारा तंत्र कितनी जल्दी रिस्पांस करता है तथा जिला स्तर पर मौजूद संसाधनों का किस प्रकार से प्रयोग किया जाता है। इन सब की समीक्षा के लिए शुक्रवार को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अथॉरिटी की ओर से ऑनलाइन आपदा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हरियाणा सरकार में एसीएस पी.के.दास ने भूकंप आपदा प्रबंध बारे आवश्यक निर्देश दिए। दास ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम हमें प्रशासनिक स्तर पर अपडेट रखते हैं और दिए गए निर्देशों की अनुपालना सभी जिला स्तर पर अधिकारी सुनिश्चित करें। राष्ट्रिय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य राजेन्द्र सिंह ने भी कार्यशाला में आपदा प्रबंधन से सम्बन्धित जानकारी दी।
रेवाड़ी में वर्चुअल रूप से जुड़े डीसी यशेंद्र सिंह ने संबंधित अधिकारियों को आपदा की स्थिति से निपटने में सजगता बरतने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कार्यशाला के माध्यम से दिए निर्देशों बारे कहा कि घटना घटने के बाद हमारा तंत्र जितना जल्दी अपनी जिम्मेदारी के अनुसार कार्य शुरू कर देता है उतना ही जान और माल का कम नुकसान होता है। सभी अधिकारियों को पहले से ही अपनी जिम्मेदारी का पता होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिलों में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सतर्क एवं मजबूत होना चाहिए तथा हमें अन्य जिलों व राज्यों के साथ भी पूरा तालमेल रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां भी आपदा प्रबंधन योजना अच्छी तरह तैयार होगी वहां पर अधिकारी भी पहले ही दिमागी तौर पर तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान लोगों को सही सूचना मिलनी चाहिए। इसके लिए विभिन्न प्रकार के मीडिया का प्रयोग अच्छी तरह से करना चाहिए। सही समय पर और सही सूचना देना भी जिला प्रशासन का मुख्य कार्य होता है। ऐसी व्यवस्था से लोग पहले ही जागरूक रहते हैं तथा किसी भी स्थिति से निपटने के लिए वे तैयार रहते हैं।

उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित संबंधित अधिकारियों को कहा कि कई बार बड़ी घटना घटने के बाद भी कई दिन तक घटनास्थल पर खोज कार्य करना पड़ता है। ऐसे में पूरे तंत्र को सभी प्रकार की तैयारियां पहले से ही रखनी होंगी। उन्होंने कहा कि सभी कम्युनिकेशन प्लान अच्छी तरह से अपडेट होना चाहिए। जिला में वालंटियर की पूरी टीम को एकदम कार्य पर बुलाने के लिए सिस्टम बनाना है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन एक बहुस्तरीय योजना है जो प्राकृतिक आपदाओं (सूखा, बाढ़, तूफान, चक्रवात, भूस्खलन) और मानवीय आपदाओं के साथ-साथ बीमारी के तेजी से प्रसार को रोकने इत्यादि मुद्दों पर कार्य करती है। प्रकृति में पाए जाने वाले चार प्रमुख तत्व अग्नि, वर्षा, पवन और पृथ्वी जो मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी एवं विनाशकारी हो सकते है। इनसे खेलना इतना नुक्सानदयाक हो सकता है जिसका अंदाजा लगा पाना भी बहुत मुश्किल है।
डीसी यशेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम रेवाड़ी सिद्धार्थ दहिया ने कार्यशाला में प्रशासनिक स्तर पर दिए गए दिशा-निर्देशों की अनुपालना बारे अवगत कराया। आपदा प्रबंधन से सम्बन्धित सभी अधिकारी रेगुलर प्लान बनाएं और समय-समय पर जनता को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन से सम्बन्धित सभी यंत्र पूरे होने चाहिए और सम्बन्धित अधिकारियों व कर्मचारियों को पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी और गैर सरकारी भवन है, एनसीआर में भी जो भवन है उनका निरीक्षण करें तथा उससे सम्बन्धित कमियों को दूर करे।





