आपको बता दें कि बेटा –बेटी एक समान, सभी को मिले शिक्षा और सम्मान ..इस नारे के साथ समाजसेवी एडवोकेट कैलाशचंद ने मिशन एजुकेशन मुहीम चलाई हुई है. जिस मुहीम के तहत एडवोकेट कैलाशचंद रेवाड़ी के अलग –अलग स्थानों पर झुग्गी –झोपडी स्कूल चला रहे है.
एडवोकेट कैलाशचंद का कहना है कि वर्ष 2011 में जिला अदालत के एक न्यायधीश झोगी झोपडी में रहने वाले लोगों के बीच पहुँचे थे. जहाँ उन्होंने इन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता व्यक्त की थी. तब उन्होंने इन बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया था और तब से ही वो इसी तरह से पाठशाला लगा रहे थे. लेकिन कॉविड के कारण उन्हें कुछ समय तक ये पाठशाला बंद करने पड़ी थी.
कैलाश चंद एडवोकेट के साथ विजय लक्ष्मी, सीमा एड्वोकेट, ध्रुव कुमार, कमल कांत, वंदना व् भगवानदास गरीब बच्चों को शिक्षित करने की मुहीम में आगे बढ़ रहे है. रेवाड़ी में अलग –अलग जगह इस तरह से कई स्थानों पर गरीब बच्चों को शिक्षित करने की मुहीम समाजसेवी चला रहे है. आप जब इन स्थानों पर जायेंगे तो महसूस करेंगे की गरीब बच्चों की एक बड़ी आबादी है जो स्कूलों में नहीं जा रही है.
जो सवाल खड़ा करती है कि आखिर क्यों सरकारी स्कूलों में इन बच्चों का दाखिला नहीं कराया जाता, एडवोकेट कैलाशचंद का कहना है कि वो चाहते है कि सरकार इन बच्चों के पढने की व्यवस्था करें. ताकि उन्हें इस तरह से क्लास लगाकर ना पढ़ना पड़े. उन्होंने कहा कि सरकार झुग्गी-झोपडी में रहने वाले लोगों का दर्द नहीं समझती. कोनसीवास रोड़ स्थित जिस जगह झुग्गी झोपडी है इस जगह तीन वर्षों से पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है.





