रोहतक, 25 जुलाई : अतिरिक्त उपायुक्त एवं जिला परिषद तथा डीआरडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत गठित स्वयं सहायता समूह की सदस्या को स्थायी आजीविका उपलब्ध करवाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्थानीय जिला विकास भवन में ‘पशु सखी’ के लिए प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में मिशन द्वारा जिला के सभी 5 खंडों के 16 गाँवों की 27 सक्रिय समूह सदस्या को पशु सखी का प्रशिक्षण दिया गया।
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने प्रशिक्षण के दौरान पशु सखी (प्रशिक्षणार्थी) को संबोधित करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार के महत्वपूर्ण फैसले के तहत अब जिला के स्वयं सहायता समूह की सदस्या पंचायत की शामलात भूमि पट्टे पर लेकर डेयरी गतिविधियां शुरू कर सकेंगी। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एचएसआरएलएम) से जुड़े स्वयं सहायता समूहों को डेयरी व्यवसाय से जोडऩे के लिए विकास एवं पंचायत विभाग ने नए नियम और शर्तें जारी की हैं।
नरेंद्र कुमार ने कहा कि ग्रामीण परिवेश में पशुपालन एक परंपरागत स्थायी आजीविका है। पशुपालन में महिलाओं का योगदान विशेष है। इसलिए आजीविका मिशन के तहत जुड़ी ज्यादा से ज्यादा समूह सदस्या के लिए यह एक स्थायी आजीविका बन सकती है। इस संदर्भ में हरियाणा सरकार के महत्वपूर्ण फैसले का जिक्र करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा कि समूह में ज़्यादातर गरीब परिवार की महिला सदस्या जुड़ी हुई हैं, जिनके पास परिवार के रहने के लिए भी प्रयाप्त आवास की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में वो चाह कर भी पशुपालन आधारित आजीविका करने में असमर्थ हैं। इस समस्या का निवारण करते हुए सरकार ने नियम बनाया है कि समूह कि महिलाओं को डेयरी आधारित स्वरोजगार करने के लिए समूह सदस्या मिलकर पंचायत की शामलात भूमि पट्टे पर लेकर डेयरी का संचालन कर सकती हैं।
अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत उपायुक्त ग्राम पंचायत को 500 वर्ग गज तक की शामलात भूमि दो वर्ष की अवधि के लिए पट्टे पर देने की अनुमति दे सकेंगे। यदि स्वयं सहायता समूह की डेयरी गतिविधियां संतोषजनक पाई जाती हैं, तो पट्टे की अवधि को अतिरिक्त तीन वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए स्वयं सहायता समूह का कम से कम एक वर्ष से सक्रिय होना आवश्यक है। समूह के पास नियमित बचत और ऋण का रिकॉर्ड होना चाहिए। समूह की सभी सदस्या उसी ग्राम पंचायत की निवासी होने चाहिए तथा समूह में कम से कम 10 सदस्या होना भी अनिवार्य है। इसके साथ ही समूह की बैठकों में सदस्यों की कम से कम 75 प्रतिशत उपस्थिति भी जरूरी होगी।
उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा कि इसके अतिरिक्त समूह का किसी सरकारी योजना या बैंक में कोई लंबित विवाद अथवा डिफॉल्ट नहीं होना चाहिए। जिन स्वयं सहायता समूहों के किसी सदस्य या उसके परिवार के नाम परिवार पहचान पत्र के अनुसार 500 वर्ग गज या उससे अधिक भूमि दर्ज है, वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। इच्छुक स्वयं सहायता समूह संबंधित ग्राम पंचायत को आवेदन कर सकते हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराने, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा गांवों में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम है।
हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन रोहतक के जिला कार्यक्रम प्रबंधक योगेश पाराशर ने पशु सखी प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में कहा कि जिला में समूह की 50 सक्रिय सदस्या को चयनित एवं प्रशिक्षित करके पशुपालन से जुड़ी समूह सदस्या के सहयोग हेतु पशु सखी के तौर पर कार्य करने की जि़म्मेदारी दी जाएगी। पशु सखी का कार्य पशुपालक समूह सदस्या को पशु के उचित प्रबंधन में सहयोग, पौष्टिक आहार की उपलब्धता, दुग्ध का उचित दर पर बिक्री एवं भूमिहीन समूह सदस्या, जो पशुपालन करने की इच्छुक है, उसे सरकार की उक्त महत्वपूर्ण योजना से जोडक़र पट्टे पर जमीन दिलवाना, पशु खरीदने के लिए ऋण (बैंक से व्यक्तिगत या समूह से) दिलवाना एवं दुग्ध का उचित दर पर बिक्री करवाना इत्यादि होगा ताकि अविलम्ब एवं बिना किसी अवरोध के उसकी आजीविका का सफल संचालन करते हुए मिशन के मुख्य उद्देश्य की पूर्ति हो सके।
इस अवसर पर मिशन कर्मी वाईपी राहुल मलिक, लेखाकार कमलेश, बीसीसी रीना एवं हेमलता उपस्थित रहे।
पंचायत की शामलात भूमि स्वयं सहायता समूह को पट्टे पर उपलब्ध कराने के नए नियम लागू :- अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार





