गुरुग्राम, 22 जून। जिला स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की त्रैमासिक बैठक सोमवार को एडीसी सोनू भट्ट की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत जिले में दर्ज मामलों की समीक्षा की गई। साथ ही पीड़ितों को प्रदान की जा रही आर्थिक सहायता, मामलों की प्रगति तथा विभागीय कार्यवाही की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक के दौरान एडीसी सोनू भट्ट ने जिला कल्याण अधिकारी सरफराज खान से अधिनियम के तहत दर्ज मामलों और पीड़ितों को दी गई सहायता राशि की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत मामला दर्ज होने के बाद पात्र पीड़ितों को नियमानुसार आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो और संबंधित विभाग निर्धारित समयावधि में सभी औपचारिकताएं पूरी करे। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को सरकारी सहायता का लाभ शीघ्र मिले, इसके लिए विभागीय स्तर पर सतत निगरानी रखी जाए।
एडीसी ने समिति के सदस्यों से भी अपील की कि वे ऐसे मामलों में पीड़ितों को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करवाने और आवेदन प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम का उद्देश्य केवल कानूनी संरक्षण प्रदान करना नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित व्यक्तियों को संबल देना भी है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिनियम के तहत मामला दर्ज होते ही उसकी सूचना तत्काल संबंधित विभागों तक पहुंचाई जाए ताकि सहायता राशि जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।
बैठक में जिला कल्याण अधिकारी सरफराज खान ने बताया कि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विभिन्न श्रेणियों के मामलों में पीड़ितों को 85 हजार रुपये से लेकर 8 लाख 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि चालू वर्ष के दौरान अधिनियम के तहत दर्ज 15 मामलों में पात्र पीड़ितों को प्रथम किस्त के रूप में आर्थिक सहायता उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।
बैठक में सहायक पुलिस आयुक्त कपिल,संबंधित विभागों के अधिकारी तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।





