रोहतक, 23 मई : मूलरूप से जिला के गांव आंवल की बहू 35 वर्षीय शिक्षित गृहिणी मनोही खन्ना (वर्तमान में दिल्ली निवासी) ने अपनी मेहनत, लग्न और वैज्ञानिक सोच के बल पर मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों को अवसर में बदलते हुए एक सफल मत्स्य उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
मनोही खन्ना ने अपनी सास ऊषा खन्ना से प्रेरणा लेकर वर्ष 2021 में 2.5 एकड़ के तालाब में मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया। शुरुआत में उन्हें मत्स्य पालन का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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वैज्ञानिक प्रशिक्षण से मिली सफलता :-
मत्स्य पालन की आधुनिक तकनीकों को समझने के लिए मनोही ने हिसार स्थित एआरटीआई (मत्स्य पालन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान) से वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में पंगेसियस तथा आईएमसी मछलियों का पालन शुरू किया। उन्होंने अपने तालाब में लगभग 8,000 से 10,000 मछली बीज डाले और उचित तालाब प्रबंधन, नियमित देखभाल तथा समर्पण के माध्यम से उत्कृष्ट उत्पादन हासिल किया।
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40-45 मीट्रिक टन उत्पादन और लाखों की आय :-
मनोही खन्ना के प्रयासों का परिणाम यह रहा कि उनका वार्षिक मछली उत्पादन 40-45 मीट्रिक टन तक पहुँच गया। इससे उन्हें लगभग 6 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त होने लगी। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि मत्स्य पालन ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार और आय का बेहतर साधन बन सकता है।
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पीएमएमएसवाई योजना से मिला सहयोग :-
मनोही की सफलता में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस योजना के अंतर्गत उन्हें 5 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई, जिसकी सहायता से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया और आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को अपनाया। आज वे सफलतापूर्वक 5.5 एकड़ क्षेत्र में मत्स्य पालन का संचालन कर रही हैं।
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अन्य महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा :-
मनोही खन्ना केवल स्वयं तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे अन्य महिलाओं और किसानों को भी मत्स्य पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे लोगों को मीठे पानी की मछली पालन तकनीकों के बारे में जानकारी देती हैं तथा अपने अनुभव साझा कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
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मत्स्य विभाग और एआरटीआई हिसार को दिया श्रेय :-
मनोही अपनी सफलता का श्रेय मत्स्य विभाग और एआरटीआई हिसार को देती हैं, जिन्होंने उन्हें तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया। उनकी प्रेरणादायक कहानी यह सिद्ध करती है कि उचित प्रशिक्षण, सरकारी सहायता और कठोर परिश्रम के बल पर कोई भी गृहिणी एक सफल उद्यमी बन सकती है। तकनीकों को समझने के लिए मनोही ने हिसार स्थित एआरटीआई से वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने मत्स्य विभाग के मार्गदर्शन में पंगेसियस तथा आईएमसी मछलियों का पालन शुरू किया।
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सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं बनें आत्मनिर्भर :- उपायुक्त सचिन गुप्ता
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि जिला की अन्य महिलाओं को भी मनोही खन्ना से प्रेरणा लेकर अपनी रुचि के अनुसार सफल उद्यमी बनने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं धरातल पर लागू की गई हैं, जिनका लाभ उठाकर महिलाएं न केवल स्वयं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर सकती हैं। उपायुक्त ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत सब्सिडी प्रदान करने का प्रावधान किया गया है। मनोही खन्ना ने भी इस योजना का लाभ उठाकर समाज की अन्य महिलाओं के समक्ष एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है।उपायुक्त सचिन गुप्ता ने मनोही खन्ना के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।





