सांपला। कालिदास धाम, सांपला में विश्व हिंदू परिषद इंद्रप्रस्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित युवा संत चिंतन वर्ग का आज का दिवस अत्यंत प्रेरणादायी, ऊर्जावान और संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा। पूज्य श्री श्री 1008 परमहंस कालिदास जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, संगठन विस्तार और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन मंथन किया गया। संतों के सान्निध्य ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया, जिससे उपस्थित युवाओं में नई चेतना और उत्साह का संचार हुआ।
कार्यक्रम के दौरान बड़े दिनेश जी (केंद्रीय संरक्षक, विश्व हिंदू परिषद) एवं अशोक तिवारी (अखिल भारतीय धर्माचार्य संपर्क प्रमुख) को नवनिर्मित हॉस्पिटल का अवलोकन करवाया गया। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस अवसर पर हरिशंकर जी (सह केंद्रीय मंत्री), वरिष्ठ प्रचारक रासबिहारी जी (केंद्रीय मंत्री एवं इंद्रप्रस्थ धर्माचार्य संपर्क कार्य), तिलक राज जी (प्रांत धर्माचार्य प्रमुख), केशव भारद्वाज जी (जिला मंत्री एवं वर्ग सर्व व्यवस्था प्रमुख) तथा अनुराग कुलश्रेष्ठ (प्रांत प्रचार-प्रसार प्रमुख) सहित अनेक कार्यकर्ताओं और युवाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।
वक्ताओं के रूप में उपस्थित प्रमुख नाम:
बड़े दिनेश जी, अशोक तिवारी, हरिशंकर जी, रासबिहारी जी, तिलक राज जी, केशव भारद्वाज जी तथा अनुराग कुलश्रेष्ठ।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार केवल योजनाएं या नीतियां नहीं होतीं, बल्कि जागरूक, चरित्रवान और संगठित युवा शक्ति होती है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान सदैव उसके उच्च नैतिक मूल्यों, संस्कारों और चरित्र से रही है, और इन मूल्यों को आगे बढ़ाने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी आज के युवाओं पर है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का युवा यदि अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं से जुड़कर कार्य करेगा, तो वह न केवल अपने व्यक्तित्व का विकास करेगा, बल्कि समाज और राष्ट्र को भी नई दिशा देगा। युवाओं का सहयोग इसलिए अनिवार्य है क्योंकि वे ऊर्जा, नवाचार और संकल्प का प्रतीक हैं। जब यही युवा सकारात्मक सोच, अनुशासन और सेवा भाव के साथ आगे बढ़ते हैं, तो वे समाज में स्थायी परिवर्तन लाने में सक्षम होते हैं।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सामाजिक चुनौतियों, सांस्कृतिक विचलनों और नैतिक गिरावट के बीच युवाओं का मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक हो गया है। ऐसे में संतों का सान्निध्य युवाओं को सही दिशा देता है और उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे राष्ट्र धर्म को सर्वोपरि मानते हुए सेवा, संगठन और संस्कार के मार्ग पर चलें तथा समाज के प्रत्येक वर्ग तक सकारात्मक संदेश पहुंचाएं।
कार्यक्रम के दौरान अनुशासन, समर्पण और सेवा के मूल मंत्रों को अपनाने पर विशेष बल दिया गया। संतों ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल बड़े मंचों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों से होता है—चाहे वह समाज सेवा हो, शिक्षा का प्रसार हो या जरूरतमंदों की सहायता।
अंत में उपस्थित युवाओं और कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे, सनातन मूल्यों का प्रचार-प्रसार करेंगे और राष्ट्र सेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इस चिंतन वर्ग ने न केवल युवाओं को नई दिशा दी, बल्कि उनके भीतर राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण का भाव भी और अधिक प्रगाढ़ किया





