चंडीगढ़, 24 अप्रैल-हरियाणा सरकार द्वारा एनसीआर में वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए 23 नए सीएएक्यूएमएस स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, राज्य में संचालित कैब एवं राइड-शेयरिंग सेवाओं को विनियमित करने के लिए शीघ्र ही एग्रीगेटर पाॅलिसी लाई जाएगी।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और वायु गुणवत्ता प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न पहलों की व्यापक समीक्षा की। इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदूषण में 30-35 प्रतिशत तक कमी लाने के लक्ष्य के साथ बहु-क्षेत्रीय कार्ययोजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने एनसीआर के नगर निगम आयुक्तों तथा गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत महानगर विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे कम से कम पांच प्रमुख सड़कों की पहचान कर उन्हें मॉडल “डस्ट-फ्री” सड़कों के रूप में विकसित करें। इस सम्बन्ध में वर्ष 2026 के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने से लेकर कार्य पूर्ण होने तक की एक समग्र और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए।
उन्होंने कहा कि परिवहन, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों तथा औद्योगिक उत्सर्जन से होने वाले प्रदूषण को सटीक योजना और समयबद्ध कार्यान्वयन के माध्यम से प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना होगा।
पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल ने क्षेत्र में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की सघन जांच की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वाहन प्रदूषण मानकों के अनुपालन को जमीनी स्तर पर सख्ती से लागू किया जाए और एनसीआर के व्यस्त मार्गों पर विशेष जांच अभियान चलाकर अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उन्होंने चलती गाड़ियों के उत्सर्जन की निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक के उपयोग और उसके आधार पर चालान करने पर बल दिया।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने परिवहन विभाग को निर्देश दिए कि प्रदूषण जांच केंद्रों से डेटा एकत्रित किया जाए कि कितने मामलों में प्रमाणपत्र जारी करने से इंकार किया गया अथवा कितने मामलों में उत्सर्जन मानक निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया।
परिवहन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजा शेखर वुंडरू ने बताया कि राज्य में संचालित कैब एवं राइड-शेयरिंग सेवाओं को विनियमित करने के लिए शीघ्र ही एग्रीगेटर नीति लाई जाएगी। इससे निजी वाहनों का बड़ा बेड़ा नियामक ढांचे के तहत आएगा और यह सुनिश्चित होगा कि एग्रीगेटर से जुड़े वाहन निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करें और क्षेत्र में परिवहन से होने वाले प्रदूषण को कम करने के समग्र प्रयासों में योगदान दें।
उन्होंने यह भी बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुरूप एनसीआर के प्रमुख जिलों में डीजल ऑटो लगभग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं तथा शेष क्षेत्रों में 31 दिसंबर, 2026 तक इन्हें चरणबद्ध तरीके से बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने “नया सफर योजना” के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसके तहत लगभग 1.9 लाख पुराने ट्रकों और 16,000 बसों को हटाकर बीएस-6, सीएनजी एवं इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाया जाएगा। योजना के तहत वित्तीय प्रोत्साहन तथा टैक्स में छूट जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष श्री जे. गणेशन ने बताया कि एनसीआर में वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए सीएएक्यूएमएस की संख्या जुलाई 2026 तक 29 से बढ़ाकर 52 की जाएगी। इसके लिए मई माह के पहले सप्ताह में टेंडर जारी किए जाएंगे।
बोर्ड के सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार ने बताया कि 889 औद्योगिक इकाइयों को निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (सीईएमएस) स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे, जिनमें से 871 इकाइयों मे यह प्रणाली स्थापित की जा चुकी है और 735 इकाइयां सक्रिय रूप से डेटा साझा कर रही हैं। सभी बड़े और मध्यम उद्योगों को जुलाई तक तथा लघु उद्योगों को सितंबर 2026 तक प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों को अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के महानिदेशक श्री राज नारायण ने बताया कि वर्ष 2016 की तुलना में धान की पराली जलाने की घटनाओं में 90 प्रतिशत से अधिक कमी आई है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि लगभग 13,000 सीआरएम मशीनों की कमी की पहचान की गई है, जिसे धान कटाई सीजन से पहले पूरा कर लिया जाएगा।
मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने एनसीआर के सात नगर निगमों की वर्ष 2026 की सिटी एक्शन प्लान की भी समीक्षा की। नगर निगम आयुक्तों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया। इन कार्य-योजनाओं में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए 360 डिग्री दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें परिवहन, पुलिस, जीएमडीए, एफएमडीए, एसएमडीए, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन, लोक निर्माण, एनएचएआई, ऊर्जा और उद्योग विभागों की समन्वित भूमिका सुनिश्चित की गई है।
कार्य-योजना में सड़क धूल नियंत्रण, निर्माण एवं विध्वंस उत्सर्जन में कमी, यातायात जाम के बिंदुओं का समाधान, वायु निगरानी नेटवर्क का विस्तार, अंतिम मील कनेक्टिविटी, सड़कों की शुरू से अन्त तक पेवमेंट, हरित क्षेत्र का विस्तार, इलेक्ट्रिक बसों और ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास तथा पार्किंग सुविधाओं का विस्तार शामिल है। साथ ही, पुराने ठोस अपशिष्ट को 31 मार्च, 2027 तक पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
नगर निगमों द्वारा निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रोसेसिंग प्लांट और प्रत्येक 25 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक सेकेंडरी कलेक्शन प्वाइंट स्थापित करने की भी योजना है।
बैठक में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीनों, जल छिड़काव (वॉटर स्प्रिंकलर) तथा एंटी-स्मॉग गन के माध्यम से धूल नियंत्रण उपायों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।










