चंडीगढ़ — हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 3 अन्य नगर निगमों – अम्बाला, पंचकूला और सोनीपत, रेवाड़ी नगरपालिका परिषद, 3 नगरपालिका समितियों — उकलाना, सांपला और धारूहेड़ा
एवं 6 अन्य शहरी निकायों के एक-एक रिक्त वार्ड के उपचुनाव कराया जा रहा है जिस हेतू नामांकन भरने की प्रक्रिया गत दिवस 21 अप्रैल से आरम्भ हो गयी एवं जो शनिवार 25 अप्रैल तक चलेगी, 27 अप्रैल को नामांकन की जांच होगी एवं उम्मीदवारी वापसी का अंतिम दिन 28 अप्रैल है, मतदान 10 मई को जबकि 13 मई को मतगणना होगी
देश की दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियाँ– केंद्र और हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा, कांग्रेस पार्टी और वर्ष 2023 में नेशनल पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी ( आप) एवं हरियाणा में दो मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दल — इनेलो और जजपा उपरोक्त नगर निकाय चुनावों अपने पार्टी सिंबल ( चुनाव चिन्ह) पर उक्त नगर निकायों के चुनाव लड़ रहे हैं. भाजपा और कांग्रेस के बीच इन चुनावों में सीधी टक्कर है.
इसी बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून के जानकार हेमंत कुमार
( 9416887788) ने बताया कि बेशक हरियाणा में उपरोक्त पाँचों प्रमुख राजनीतिक दल नगर निकायों के चुनाव पार्टी सिम्बल्स पर लड़ने सम्बन्धी कुछ भी निर्णय लें, परन्तु प्रदेश विधानसभा द्वारा बनाये गए एवं मौजूदा लागू हरियाणा म्युनिसिपल कानून, 1973, जो प्रदेश की सभी नगरपालिका परिषदों और नगरपालिका समित्यों पर लागू होता है और हरियाणा नगर निगम कानून, 1994, जो प्रदेश की सभी नगर निगमों पर लागू होता है एवं उक्त दोनों कानूनों के अंतर्गत प्रदेश सरकार द्वारा बनाये गए हरियाणा म्युनिसिपल निर्वाचन नियमों, 1978 और हरियाणा नगर निगम निर्वाचन नियमो, 1994 में राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा राजनीतिक दलों के पार्टी सिम्बल्स (चुनाव चिन्हों ) पर प्रदेश में नगर निकाय चुनाव करवाने का प्रावधान या उल्लेख ही नहीं है.
हेमंत ने बताया कि उनके द्वारा बीते कई वर्षों से राज्य निर्वाचन आयोग को बार बार लिखा गया कि हरियाणा में पार्टी सिम्बल्स पर नगर निकाय चुनाव नहीं करवाए जा सकते हैं क्योंकि प्रदेश के दोनों म्युनिसिपल कानूनों और निर्वाचन नियमों में ऐसा प्रावधान एवं उल्लेख नहीं है जिसके बाद आयोग ने चार वर्ष पूर्व 28 फरवरी 2022 को प्रदेश सरकार को इस सम्बन्ध में कानून और नियमों में संशोधन कर उनमें राजनीतिक दल की परिभाषा डालने और निर्वाचित प्रतिनिधियों पर दल-बदल विरोधी प्रावधान लागू करने का प्रस्ताव भेजा गया था जिस पर प्रदेश सरकार ने विचार -विमर्श करने के बाद निर्णय लेकर उसे नामंजूर दिया था और लिखा कि हरियाणा म्युनिसिपल कानूनों में इस आशय में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं है.
यहीं नहीं आज से चार महीने पूर्व हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सदन द्वारा पारी नए हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 जो लागू होने के बाद हरियाणा के दोनों मौजूदा म्युनिसिपल कानूनों का स्थान लेगा, में भी राजनीतिक दल या दल-बदल विरोधी सम्बन्धी कोई प्रावधान नहीं डाला गया है.
हेमंत ने बताया कि जब तक प्रदेश विधानसभा द्वारा हरियाणा के नगर निकाय कानूनों में राजनीतिक दलों के चुनाव-चिन्हों पर चुनाव करवाने बारे स्पष्ट प्रावधान नहीं किया जाता, तब तक आयोग द्वारा जारी चुनाव -चिन्ह (आरक्षण एवं आबंटन ) आदेश मात्र से प्रदेश में पार्टी सिम्बल्स पर कानून नगर निकाय चुनाव करवाने पर गंभीर प्रश्न-चिन्ह उठना स्वाभाविक है.
हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग नगर निकाय चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों को गैर-राजनीतिक दलों के अर्थात फ्री सिम्बल्स (मुक्त चुनाव चिन्ह ) की सूची में से चुनाव चिन्ह आबंटित करने देने हेतु कानूनन सक्षम हैं.
हेमंत का इस बारे में यह भी कानूनन मत है कि बेशक भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 जेड.ए. में राज्य निर्वाचन आयोग के पास नगर निकाय चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण का अधिकार है परन्तु आयोग प्रदेश विधानसभा द्वारा बनाये नगर निकाय कानूनों के प्रावधानों अनुसार ही ऐसे चुनाव करवा सकता है.
अगर मात्र निर्वाचन आयोग के आदेश से राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह आबंटित करना कानून संभव होता, जैसा हरियाणा में आज तक होता रहा है, तो वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा को अपने सम्बंधित कानूनी संशोधन करने की क्या आवश्यकता थी ?
सनद रहे कि आज से पांच वर्ष पूर्व मार्च, 2021 में हिमाचल प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा मार्फ़त हिमाचल प्रदेश नगर निगम कानून, 1994 में उपयुक्त संशोधन कर प्रदेश में नगर निगमों के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्हों पर करवाने और चुनावों बाद निर्वाचित सदस्यों (पार्षदों) को पार्टी छोड़ पाला-खेमा बदलने पर अंकुश लगाने हेतू दल-बदल विरोधी संबंधी प्रावधान डाले गए थे.
हरियाणा को भी हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर हरियाणा म्युनिसिपल कानून, 1973 में संशोधन करना होगा जिसके बाद ही कानूनन प्रदेश में पार्टी सिम्बल्स पर नगर निकाय चुनाव करवाए जा सकते हैं.
हेमंत ने आगे बताया कि भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची में जो दल बदल विरोधी कानून हैं, वह केवल संसद और राज्य विधानमंडलों पर लागू होता है, नगर निकायों जैसे नगर निगमों/नगरपालिका परिषदों/नगरपालिका समितियों पर नहीं इसलिए निकाय चुनावों में निर्वाचित मेयर/अध्यक्ष/सदस्य कभी भी दल बदल कर दूसरी पार्टी में बे-रोक-टोक आ-जा सकते है जो शहरी मतदाताओ के साथ एक प्रकार का धोखा एवं मज़ाक होता है. दिसम्बर, 2020 में कांग्रेस के टिकट पर सोनीपत नगर निगम के प्रत्यक्ष निर्वाचित मेयर निखिल मदान और हरियाणा जनचेतना पार्टी (वी) के टिकट पर अम्बाला नगर निगम की प्रत्यक्ष निर्वाचित मेयर शक्ति रानी शर्मा वर्ष 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गये. आज दोनों क्रमश: सोनीपत और कालका से भाजपा विधायक हैं. यही नहीं, हरियाणा के विभिन्न नगर निकायों में गत वर्षो में कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों एवं निर्दलीय के तौर पर वार्डों से निर्वाचित सदस्य (पार्षद) भी पाला बदलकर सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल होते रहे हैं.









