Haryana: हरियाणा में 5 डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज, जानें क्या है वजह

By Sahab Ram
On: January 28, 2026 3:58 PM
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Haryana News: हरियाणा के यमुनानगर जिले में सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज (कॉटन पट्टी) छोड़ने और बाद में झूठी अल्ट्रासाउंड व सीटी स्कैन रिपोर्ट के जरिए सच्चाई छिपाने के गंभीर मेडिकल लापरवाही मामले में आखिरकार आठ महीने बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी के सख्त निर्देशों के बाद जगाधरी सिटी थाना पुलिस ने पांच डॉक्टरों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

इस मामले में एसपी अस्पताल जगाधरी की महिला डॉक्टर डॉ. सोना गोयल को मुख्य आरोपी बनाया गया है। उनके अलावा उनके पति और डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. अनुप गोयल, इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर के डॉ. प्रदीप तेहलान, मेहता अल्ट्रासाउंड सेंटर के डॉ. निखिल मेहता और मॉडल टाउन स्थित चड्ढा अस्पताल के डॉ. कुलदीप चड्ढा को भी आरोपी बनाया गया है।

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ऑपरेशन के दौरान हुई चूक, बाद में रिपोर्टों से छिपाई सच्चाई

पीड़िता 21 वर्षीय मेहर खातून पत्नी ओसामा, निवासी गांव बीबीपुर (जगाधरी) ने बताया कि 12 मार्च 2025 को उसे चेकअप के लिए एसपी अस्पताल जगाधरी ले जाया गया था। अगले दिन 13 मार्च को डॉ. सोना गोयल ने सिजेरियन ऑपरेशन किया, जिसमें एक स्वस्थ बेटे का जन्म हुआ। आरोप है कि इसी ऑपरेशन के दौरान महिला के गर्भ में सर्जिकल स्पंज छोड़ दिया गया।

ऑपरेशन के बाद शुरू में हालत सामान्य रही, लेकिन कुछ दिनों बाद टांकों के आसपास तेज दर्द, सूजन और कमजोरी होने लगी। इसके बाद अलग-अलग डायग्नोस्टिक सेंटरों पर कराए गए अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन में जानबूझकर गलत और नॉर्मल रिपोर्ट दी गईं, ताकि ऑपरेशन के दौरान हुई लापरवाही को छिपाया जा सके।

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बार-बार इलाज, बिगड़ती हालत और जान का खतरा

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की मिलीभगत के कारण मेहर को गलत इलाज की ओर धकेला गया। कई बार भर्ती कराने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। 21 मई 2025 को स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद उसे पंचकूला के सेक्टर-26 स्थित ओजस अस्पताल ले जाया गया। यहां जांच में खुलासा हुआ कि महिला के गर्भ में लंबे समय से सर्जिकल स्पंज फंसा हुआ है, जिससे गंभीर संक्रमण फैल चुका है।

24 मई को इमरजेंसी ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को मेहर की आंत का एक हिस्सा काटना पड़ा, ताकि पट्टी को बाहर निकाला जा सके। डॉक्टरों ने बताया कि अगर कुछ दिन और देरी हो जाती, तो महिला की जान बचना मुश्किल था। बाद में संक्रमण के कारण एक और बड़ा ऑपरेशन करना पड़ा।

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10 लाख से ज्यादा खर्च, ग्रीवेंस कमेटी में उठा मामला

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस पूरे इलाज में करीब 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं और वे आर्थिक, मानसिक व शारीरिक रूप से पूरी तरह टूट चुके हैं। न्याय की मांग को लेकर मामला डीसी स्तर से होते हुए ग्रीवेंस कमेटी तक पहुंचा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी की अध्यक्षता में हुई बैठकों में जांच के बाद लापरवाही की पुष्टि हुई।

Sahab Ram

हरियाणा मीडिया में पिछले 14 सालों से सक्रिय। Yuva Haryana, Khabar Fast, STV Haryana News, खबरें अभी तक, A1 Tehelka में अपनी सेवाएं दी। चौपाल टीवी डिजिटल मीडिया के संस्थापक ।

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