
कृषि कानूनों के विरोध में ढासा बॉर्डर पर चल रहे किसानों के धरने में शामिल एक बुजुर्ग किसान की मौत हो गई है। शुक्रवार सुबह उसकी अचानक तबीयत बिगड़ी और फिर मौत हो गई। शुक्रवार को सुबह वह धरनास्थल पर बैठे हुए थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ी। साथी उन्हें अस्पताल लेकर गए तो चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
बुजुर्ग राजपाल कादियान 86 वर्ष के थे, इसके बावजूद भी वो शुरू से ही धरनास्थल पर डटे हुए थे ।बुजुर्ग किसान को उनके पैतृक गांव दुबलधन से धरने पर मौजूद किसान नेताओं ने श्रद्धांजलि दी और उनके शरीर पर किसान यूनियन का झंडा लपेटा। किसान नेताओं ने उन्हें क्रांतिकारी बताया और कहा कि उनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। अंतिम सांस तक कृषि कानूनों की वापसी को लेकर संघर्ष चलता रहेगा।।
किसान नेताओ ने खा कि इतने किसानों की शहादत के बाद भी सरकार किसानों की कोई सुध नहीं ले रही। किसानों ने कहा कि वे कृषि कानूनों की वापसी तक घर वापिस नही जायेंगे। दिल्ली की सीमाओं के साथ हरियाणा के विभिन्न इलाकों में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरनों पर काफी किसानों की मौत हो चुकी हैं। कुछ किसान सड़क हादसों में तो कई किसानों ने धरनास्थल पर ही अंतिम सांस ली।








