हरियाणा सरकार ने हाल ही में निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के छात्रों को 10 प्रतिशत कोटा प्रदान करने वाले स्कूली शिक्षा नियम से छुटकारा पा लिया है. क्योंकि यह नियम केंद्र सरकार के शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून से अलग था. हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग ने हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम, 2003 से नियम 134ए को हटा दिया है. इस कदम से लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में काफी मदद मिलेगी. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को अब कॉलेजों में फीस नहीं देनी होगी. इसकी जिम्मेदारी सरकार ने ली है.
खट्टर ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गरीब परिवार का कोई भी प्रतिभाशाली छात्राएं अपने सपनों को पूरा करने से ना चूके. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी परिवार पहचान पत्र योजना के तहत उन लोगों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी, जिनकी सत्यापित पारिवारिक आय 1.80 लाख प्रति वर्ष से कम है. बता दें कि मुख्यमंत्री ने यह घोषणा पंचकूला में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मान कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के ‘सुपर 100 कार्यक्रम’ के तहत सिविल सेवा परीक्षा-2020 और जेईई एडवांस परीक्षा-2021 में सफलता प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए कहा कि गरीब पृष्ठभूमि के 29 छात्रों की परीक्षा पास की, मुझे उम्मीद है कि आप जो भी क्षेत्र चुनेंगे उसमें आप सभी हरियाणा को गौरवान्वित करेंगे.
खट्टर ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश में ऐसे संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें केजी से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक की शिक्षा दी जाएगी. उन्होंने कहा, “शुरुआत में हम चार विश्वविद्यालयों में केजी से पीजी तक की शिक्षा देने की व्यवस्था करने जा रहे हैं. कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने इस शैक्षणिक सत्र 2021-22 से केजी से पीजी योजना के तहत प्रवेश की तैयारी शुरू कर दी है.





