हरियाणा रोडवेज में कार्यरत चालक और कर्मशाला सहायक पक्के नहीं होंगे। आउटसोर्सिंग नीति पार्ट-2 के तहत लगे 200 से अधिक चालकों, सहायकों को कच्ची नौकरी से ही संतोष करना होगा। परिवहन विभाग ने इनकी सेवाएं कौशल रोजगार निगम को सौंपने का फैसला लिया है। शुक्रवार को चालकों और कर्मशाला सहायकों को निगम में शामिल किए जाने का पत्र थमा दिया गया।
विभाग के फैसले से कर्मचारियों में नाराजगी है। उन्होंने निगम के बजाय विभाग में ही सेवाएं जारी रखने की मांग की है। शुक्रवार को विभाग के निर्णय के विरोध में हरियाणा राज्य परिवहन कर्मशाला यूनियन और हरियाणा रोडवेज कर्मचारी एकता यूनियन की अलग-अलग बैठकें हुईं। यूनियन नेताओं ने विभाग के फैसले को कर्मचारी विरोधी करार दिया।
कर्मशाला यूनियन के राज्य प्रधान नीरज कुमार व महासचिव हरिकृष्ण ने कहा कि चालक व कर्मशाला सहायकों को अब पक्का होने की उम्मीद थी। ये विभाग में छह साल से कार्यरत थे। रोजगार निगम में भेजने से इनकी सेवाएं अब नियमित नहीं होंगी। ये कच्चे कर्मचारी के तौर पर ही कार्य करते रहेंगे।
कर्मचारी एकता यूनियन के प्रधान बलवान दोदवा ने कहा कि रोजगार निगम में भेजे गए चालक व कर्मशाला सहायक हर मंच पर विभाग के फैसले का विरोध करेंगे। अब उनके पक्का होने का समय था, निगम के जरिये सेवाएं देने पर भी उनका शोषण जारी रहेगा। सरकार निर्णय को वापस लेते हुए इन्हें परिवहन विभाग में ही रखे और पक्का करे।










