
डीसी यशेन्द्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के तहत केन्द्र सरकार ने वर्ष 2025 तक पूरे देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से टोल फ्री नंबर 1800-11-6666 पर कोई भी व्यक्ति टीबी से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकता है।
डीसी ने जिला के नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि टीबी को हल्के में न लें। यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा खांसी या खांसी में बलगम या बलगम में खून आना, भूख व लगातार वजन कम होना, शाम के समय बुखार, रात को पसीना आना इत्यादि में से कोई भी लक्ष्ण दिखाई दे तो तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच करवाएं। यदि जांच में टीबी पाई जाती है तो तुरंत टीबी का ईलाज शुरू करना चाहिए।

टीबी का ईलाज सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को टीबी हो जाती है तो उसे डॉक्टर की सलाहनुसार पूर्ण ईलाज लेना चाहिए व दूसरे लोगों को टीबी से बचाने के लिए सावधानी बरतते हुए इधर-उधर खुले में नहीं थूकना चाहिए और खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा लगाना चाहिए।
टीबी मरीज को ईलाज के लिए मिलते हैं प्रतिमाह पांच सौ रुपए :
डीसी ने बताया कि टीबी मरीज को ईलाज की अवधि के दौरान प्रतिमाह 500 रुपये पोषण भत्ता दिया जाता है। इसके अलावा सरकार टीबी के नए मरीजों की जानकारी देकर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नोटीफाई करवाने वाले व्यक्तियों को भी 500 रुपये प्रोत्साहन भत्ता मिलता है। उपायुक्त ने बताया कि प्राइवेट प्रोवाइडर द्वारा टीबी के नए मरीज को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नोटीफाई करवाने तथा उसके ईलाज का परिणाम सरकार को देने पर नियमानुसार एक हजार रुपये प्रोत्साहन भत्ता दिया जाता है।
ये हैं टीबी रोग के लक्षण :
डीसी ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से ज्यादा खांसी या खांसी में बलगम या बलगम में खून आना, लगातार वजन कम होना, भूख ना लगना, दोपहर बाद बुखार आना, रात को पसीना आना इत्यादि लक्षण टीबी के हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि जिस किसी भी व्यक्ति को टीबी हो गई है तो उसे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। टीबी का ईलाज संभव है।
मरीज को चाहिए कि वह डॉक्टर की सलाहनुसार उपचार लें। टीबी खांसने और छींकने से फैलती है, इसलिए टीबी मरीज को इधर-उधर खुले में नहीं थूकना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा लगाना चाहिए। भीड़ वाली जगह पर जाने से बचना चाहिए।





