मिली जानकारी के अनुसार गांव जोनावास निवासी प्रदीप कुमार ने रेवाड़ी कोर्ट में इस्तगासा दायर करके बताया कि गांव जोनावास निवासी पूर्व सरपंच के बेटे हरिओम, सूरजभान पंच, विनोद कुमार पंच, लता देवी ने गांव के ही रहने वाले तरूण कुमार को मनरेगा के तहत मजदूर दिखाया. साथ ही वर्ष 2013 में पंचायती फंड से काफी राशि उसके खाते में डाल दी.
इसके आलावा प्रदीप की मानें तो आरोपियों ने आपस में मिलकर विकास कार्यों में भी जरूरत से ज्यादा धनराशि खर्च कर दी. इसकी जानकारी भी उसने अपने स्तर पर जुटाई और फिर इसकी शिकायत डीसी व एसडीएम को दी. एसडीएम की जांच में वर्ष 2017 में आरोपियों को दोषी माना गया, जिसमें पाया गया कि आरोपियों ने पंचायती फंड में गबन किया है.
आपको बता दे कि जब तरूण कुमार के खाते में पैसे डाले और उसको मनरेगा के तहत मजदूर दिखाया टैब वह नाबालिग था. आरटीआई के तहत मिली जानकारी से जुटाए सबूत में वर्ष 2012-13 के बीच तरूण कुमार रोहतक जिले के महम स्थित एक स्कूल में 10वीं कक्षा में पढ़ता था. उसकी जन्म तिथि से लेकर अन्य सबूत उसने अपने स्तर पर जुटाए. इसी प्रकार जन्म से विकलांग महिला केला देवी व दूसरे किसी गांव के राजसिंह को भी मनरेगा में मजदूर दिखाकर काफी राशि पंचायती फंड से जारी करा दी गई.
इसके बावजूद उन पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उसने कोर्ट में इस्तगासा दायर किया. अब कोर्ट के आदेश पर धारूहेड़ा थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है.





