फसल अवशेष जलाने से हमारी आने वाली पीढ़ियों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जिला के किसानों से भी अपील की कि वे फसल अवशेषों का समुचित प्रबंधन करने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें, कहीं पर भी खेतों में फसल अवशेष न जलाएं, सरकार द्वारा कृषि यंत्र किसानों को अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है।
उन्होंने अपील की कि किसान पर्यावरण एवं स्वास्थ्य हित में अपना फर्ज एवं दायित्व निभाते हुए गेहूं की खूंटी को खेतों में आग न लगाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण से सांस, फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के अलावा अस्थमा व कैंसर जैसी बिमारियां फैल रहीं हैं।
6 महीने की जेल व 15 हजार रुपए जुर्माना या दोनों का प्रावधान :
डीसी ने अपील करते हुए कहा कि किसानों को चाहिए कि वे सरकार द्वारा चलाई जा रही फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित योजनाओं का लाभ उठाएं और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने में अपना सहयोग करें। उन्होंने बताया कि मानव स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय, एनजीटी और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंभीर है और ऐसे मामलों में भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि यदि कोई किसान या व्यक्ति खेतों में गेहूं की खूंटी जालाता है तो आईपीसी की धारा 188 के तहत 6 महीने की जेल व 15 हजार रुपए जुर्माना या दोनों को प्रावधान है। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन करने से हम भूमि की उर्वरा शक्ति, पशु पक्षियों के बचाव एवं मानवीय दुर्घटनाएं होने से बचा सकते हैं।











