जानकारी अनुसार, रेवाड़ी के कस्बा कोसली स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के मैनेजर आशीष नरूला ने बताया कि कोसली के गांव झाल निवासी धर्मबीर, रिंकू रानी, गांव लुहाना निवासी सुनील कुमार व झज्जर के गांव तुम्बाहेड़ी निवासी सुमन ने गोल्ड लोन स्कीम के तहत उनकी ब्रांच में आवेदन किया था.
चारों आरोपियों को अलग-अलग तारीख पर लाखों रुपए लोन पास करके दे दिए गए. धर्मबीर को 16 जनवरी 2021 को 2 लाख 90 हजार, रिंकू रानी को 23 नवंबर 2020 को 4 लाख 48 हजार और 27 जनवरी 2021 को 4 लाख 88 हजार 250 रुपए, सुनील कुमार को 1 मार्च 2021 को 2 लाख 9 हजार रुपए तथा 12 मार्च 2021 को 2 लाख 64 हजार रुपए दिए गए. सुमन को 30 मार्च 2021 को 2 बार में 2 लाख 20 हजार और 1 लाख 58 हजार रुपए गोल्ड लोन रखने पर दिए गए.
बैंक ने आवेदकों द्वारा दिए गए सोने के आभूषण की शुद्धता की जांच कराई. बैंक को आरोपियों द्वारा रखे गए सोने की शुद्धता पर शक हुआ. इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर लैब से फिर से सोने की जांच कराई गई तो शातिरों द्वारा किए गए असली खेल का पता चल गया. लैब में हुई जांच में सोना नकली पाया गया.
कुल गहनों में कुछ ग्राम ही सोने की शुद्धता मिली, जबकि 50 से 60 प्रतिशत तक सोना नकली मिला. इतना ही नहीं आरोपी गिरवी रखे सोने को बैंक से वापस भी लेने नहीं पहुंचे. इसके बाद बैंक ने आरोपियों को रिकवरी के नोटिस भेजे, लेकिन आरोपियों ने उसका भी जवाब नहीं दिया. रिकवरी की रकम 20 लाख रुपए से ज्यादा है. इसलिए आरोपियों के खिलाफ पुलिस को शिकायत दी गई.
लेकिन कोसली थाना पुलिस ने मामले को लटकाए रखा तो बैंक मैनेजर की तरफ से एसपी को शिकायत दी गई. अब एसपी के आदेश पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ बैंक के साथ धोखाधड़ी करने का केस दर्ज किया है.





