निशक्त असहाय बुजुर्ग पेंशन के लिए खा रहा धक्के, समाजसेवी ने सबंधित विभागों को लिखा पत्र

By Sahab Ram
On: March 11, 2022 12:08 PM
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रोजाना ऐसे मामले सामने आते है. जिन मामलों में जरूरतमंद व्यक्ति सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाता है. और काफी जद्दोजहद उन्हें करनी पड़ती है. आज ऐसे ही एक मामले की हम आपको जानकारी दे रहे है. ताकि निशक्त और जरुरतमंदों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सकें और उन्हें अपने अधिकारों का भी पता लग सकें.

रेवाड़ी शहर के मुक्तिवाड़ा मोहल्ले के रहने वाले बुजुर्ग बिशम्बर निशक्त और असहाय है. जिनके आगे –पिछे कोई नहीं है. भूख लगती है तो वह घंटेश्वर मंदिर या इधर – उधर खाना खा कर अपना पेट भर लेते है. वैसे तो बुजुर्ग बिशम्बर की उम्र करीबन 70 वर्ष है. लेकिन वोटर कार्ड और आधार कार्ड में उनकी उम्र 57 वर्ष दर्शाई हुई है . जिसके कारण उन्हें वर्द्ध आश्रम में भी नहीं रखा जा सकता है.और ना ही उनकी बुढ़ापा पेंशन बनी है.  ये केवल एक बुजुर्ग बिशम्बर की कहानी नहीं है बल्कि ऐसे काफी लोग है. जो इसी तरह से मर –मर कर जीने को मजबूर है.

जो लोग कहीं आने –जाने में सक्षम होते है. वो दफ्तरों के चक्कर लगाकर अपने काम को करवा लेते है. लेकिन जो निशक्त और असहाय होते है. वो सरकार की योजनाओं से वंचित रह जाते है. एडवोकेट कैलाश चंद से जानेगें कि ऐसे व्यक्ति के क्या अधिकार है और अगर वो कहीं आने-जाने में सक्षम नहीं है तो उनकी कैसे और क्या मदद की जा सकती है.    

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senior citizen rights

यहाँ आपको बता दें कि एडवोकेट कैलाश चंद लोगों की मदद करते रहते है. बुजुर्ग बिशम्बर भी किसी तरफ से एडवोकेट कैलाश चंद के संपर्क में आयें. जिन्होंने बुजुर्ग का परिवार पहचान पत्र बनवा दिया है. जो काफी समय से बुढ़ापा पेंशन के लिए सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहा है. लेकिन जानकारी के अभाव में और सिस्टम की खामियों के कारण उनकी बुढ़ापा पेंशन नहीं बन पाई है.   

आँखों का इलाज ना होने के कारण उन्हें ना के बराबर दिखाई देता है. और ना ही सुनाई देता है. जिनकी आय का कोई स्रोत नहीं है. और ना ही परिवार में कोई और है. बुजुर्ग के रिश्तेदार भी है या नहीं इसकी जानकारी भी नहीं है. एडवोकेट कैलाश चंद ने बताया कि उन्होंने बुजुर्ग को समाज कल्याण विभाग भेजा था जहाँ से उन्हें नागरिक अस्पताल भेजा दिया गया और फिर नागरिक अस्पताल ने समाज कल्याण विभाग भेज दिया गया . लेकिन मदद कोई नहीं की गई.  

फिलहाल एडवोकेट कैलाशचंद ने बुजुर्ग के रिहायशी प्रमाण पत्र की फ़ाइल तैयार कर दी है. और आयुक्त दिव्यांगजन विभाग, निदेशक सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग, जिला उपायुक्त, जिला समाज कल्याण अधिकारी को एक प्रार्थना पत्र दिया है. ताकि बुजुर्ग को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा सकें.

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