
उपायुक्त यशेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में आज चिन्हित अपराधों के बारे में जिला सचिवालय में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में डीसी ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि जो मामले चिन्हित अपराध योजना के तहत आते है, पुलिस विभाग उनकी पूरी गहनता से जांच कर रिपोर्ट तैयार करें। ऐसे मामलों की जांच संबंधित पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट कमेटी के समक्ष अवश्य प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग चिन्हित अपराधों में कोर्ट में जाने से पहले उसकी अच्छी रिपोर्ट तैयार करें ताकि अपराधी को अधिक से अधिक सजा मिल सके।

उपायुक्त ने कहा कि प्राय: देखने में आया है कि कोर्ट में केस की मजबूती न होने के कारण कई बार अपराधी बच जाते है। सक्ष्यों के अभाव और कमजोर पैरवी के कारण ये केस न्यायालय में टिक नहीं पाते है। इसलिए कानूनी तकनीकी और विभिन्न प्रकार के केसों में साक्ष्यों के बचाव और उनकी सुरक्षा तथा कानूनी पहलुओं द्वारा मजबूत पैरवी संबंधित अधिकारियों द्वारा की जाए, जिससे अपराधी बचने न पाएं। बैठक में मामलों से संबंधित बचाव साक्ष्य और तकनीकी कानूनी पहलुओं बारे विचार विमर्श किया गया।
एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषियों को 10 वर्ष की सजा व एक-एक लाख का जुर्माना :
डीए हरपाल ने डीसी को बताया कि एनडीपीएस(NDPS) एक्ट के तहत 751 किलो चूरा पोस्त के एक मामले में 12 जनवरी 2022 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश मित्तल की कोर्ट द्वारा तीन अपराधियों को 10 वर्ष की सजा तथा प्रत्येक दोषी को एक-एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।





