
सरकार की तरफ से सिर्फ पांच मुख्य फसलों के लिए ही स्पेशल गिरदावरी के आदेश जारी किए गए हैं। जिन फसलों के लिए स्पेशल गिरदावरी के आदेश दिए गए हैं उनमें कपास, मूंग, बाजरा, धान व गन्ने की फसल को शामिल किया गया है। इनके अलावा खरीफ सीजन की फसल ग्वार, मूंगफली, मक्का, तिल, सूरजमुखी आदि फसलों को सरकार ने नुकसान भरपाई योजना में शामिल नहीं किया है। ग्वार को छोड़कर अन्य फसलें कुछ ही एरिया में बिजाई की जाती हैं लेकिन इन फसलों में भी किसानों को उतना ही नुकसान हुआ है जितना बाकि फसलों में हुआ है। खरीफ सीजन में बारिश व जलभराव के कारण खराब हुई फसलों के नुकसान के आंकलन के लिए सरकार ने लिखित आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रदेश के कम पानी वाले रेतीले इलाके जिनमें हिसार, भिवानी, दादरी, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ आदि ऐसे जिले हैं जिनमें ग्वार की फसल सबसे ज्यादा बोई जाती है और इस बार हुई ज्यादा बारिश के कारण ग्वार की फसल की लगभग खराब हो गई है जो बची है उनमें भी दाना बिलकुल काला पड़ गया है। हालांकि 2020 के खरीफ सीजन में भी किसानों की फसलें जलभराव, सूखा व सफेद मक्खी के कारण खराब हुई थी और सरकार ने स्पेशल गिरदावरी भी करवाई थी लेकिन किसानों को अभी तक भी मुआवजा नहीं मिल पाया है।
बिना बीमा वाले किसानों को मिलेगा फायदा
खरीफ सीजन की फसलों में धान, कपास, बाजरा व मूंग की फसल को बीमा योजना में शामिल किया गया है। इसके अलावा अन्य फसलों को बीमा योजना से भी बाहर रखा गया है। सरकार की तरफ से जारी आदेशों के अनुसार किसानों को उन्हीं फसलों के नुकसान की भरपाई की जाएगी जो बीमा योजना से बाहर हैं या किसान ने बीमा नहीं करवाया हुआ है। जिन किसानों ने अपनी बीमित फसलों का बीमा करवाया हुआ है उनको सरकार की तरफ से कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
इसके अलावा फसले 50 प्रतिशत खराब होने पर पर प्रति एकड़ 6 हजार, 75 प्रतिशत खराब होने पर 9 हजार रुपए व 100 प्रतिशत खराब होने पर 12 हजार रुपए प्रति एकड़ की दर से भुगतान किया जाएगा। अन्य एरिया में बीमित फसलों का कंपनी द्वारा क्रॉप कटिंग सर्वे के आधार पर क्लेम का भुगतान किया जाएगा। सरकार के इस नियम के कारण ग्वार वाले किसानों को दोनों तरफ से नुकसान होगा। ना तो सरकार ने इसे मुआवजे की योजना में शामिल किया है और ना ही ग्वार की फसल का बीमा करवाया जा सकता है।
जलभराव के कारण अगर धान की फसल को नुकसान होता है तो उसका बीमा योजना में क्लेम कवर नहीं किया जाता है। अभी तक यह स्थिति सपष्ट नहीं है कि जिन किसानों ने धान का बीमा करवाया हुआ है और जलभराव के कारण उनकी फसल खराब हो गई है, तो उनके नुकसान की भरपाई किस तरह से होगी।










