हरियाणा विधानसभा में पेश हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 में नगर निगम मेयर पद के उपचुनाव हेतु किया गया प्रावधान
मौजूदा हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में हालांकि उपचुनाव का प्रावधान रिक्त हुए मेयर पद पर लागू नहीं
फरवरी-मार्च 2025 में कानूनी व्यवस्था न होने बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अंबाला और सोनीपत नगर निगमों के रिक्त मेयर पद के लिए कराया गया था उपचुनाव
सदन में पेश हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2005 में दोनों मेयर उपचुनाव के निर्वाचन को कानूनी मान्यता देने हेतू नहीं किया गया प्रावधान – एडवोकेट हेमंत
चंडीगढ़– 18 दिसम्बर 2025 से आरम्भ हुए हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में अन्य विधेयकों के साथ साथ हालांकि हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 1994 भी पेश किया गया परन्तु इस संशोधन बिल (विधेयक) मार्फ़त आज से नौ महीने पूर्व फरवरी-मार्च 2025 में हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा अम्बाला और सोनीपत नगर निगमों के मेयर पद के लिए कराये गये उपचुनाव को कानूनी वैधता अर्थात वैधानिक मान्यता देने हेतु उपयुक्त प्रावधान नहीं किया गया है.
पंजाब एवं हाईकोर्ट में एडवोकेट और म्युनिसिपल कानून जानकार हेमंत कुमार ने प्रदेश विधानसभा में पेश हरियाणा नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 1994 का अध्ययन करने के बाद बताया कि इस विधेयक में केवल 1994 कानून की धारा 2 (8) में संशोधन कर खतरनाक बीमारियों की परिभाषा में कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) का सन्दर्भ हटाया गया है.
बहरहाल, हेमंत ने बताया कि यह अत्यंत आश्चर्यजनक है उनके द्वारा गत नौ महीनों में कई राज्य निर्वाचन आयोग और प्रदेश सरकार के साथ मामला उठाने बावजूद हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 में उपयुक्त संशोधन द्वारा अम्बाला और सोनीपत नगर निगमों के मौजूदा मेयर क्रमश: शैलजा सचदेवा और राजीव जैन, जो दोनों सत्तारूढ़ भाजपा से ही हैं एवं जिनका उपचुनाव इसी वर्ष मार्च में हुआ था, को कानूनी वैधता अर्थात वैधानिक मान्यता हेतू उपयुक्त कानूनी प्रावधान नहीं किया है. सनद रहे कि इस विषय पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय विभाग को एक नहीं बल्कि चार बार पत्र भेजा गया था.
हालांकि हेमंत ने बताया कि नए हरियाणा म्युनिसिपल (नगर निकाय ) विधेयक, 2025 जो प्रदेश के मौजूदा दोनों म्युनिसिपल कानूनों अर्थात हरियाणा म्युनिसिपल अधिनियम, 1973 और हरियाणा नगर निगम कानून, अधिनियम, 1994 को समाप्त कर अधिनियमित किया जाएगा एवं जिसे विधानसभा सदन में पेश भी कर किया गया है, में भविष्य में नगर निगम के मेयर पद के, बेशक किसी कारण के रिक्त होने कारण, उपचुनाव कराने हेतु स्पष्ट प्रावधान किया गया है. ऐसी व्यवस्था हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 की धारा 41(1) में की गई है.
हालांकि हरियाणा नगर निकाय विधेयक, 2025 में मेयर पद के उपचुनाव हेतु प्रावधान होने से वर्तमान लागू हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 के अंतर्गत कराये गये मेयर उपचुनाव को स्वत: कानूनी मान्यता प्राप्त नहीं मिल सकती है.
हेमंत ने बताया कि हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 13 (1), जो नगर निगम मेयर और निगम सदस्यों (पार्षदों) की रिक्त हुई सीटों के उपचुनाव द्वारा भरे जाने से संबंधित है, में नवम्बर-2020 में प्रदेश विधानसभा द्वारा संशोधन कर ऐसा उल्लेख कर दिया गया था कि उक्त धारा के प्रावधान रिक्त मेयर पद पर लागू नहीं होंगे अर्थात इसका सरल शब्दों में अर्थ यह है कि नगर निगम के मेयर का पद, बेशक वह किसी भी कारण से रिक्त हुआ हो, तो उसे राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव द्वारा भरा नहीं जा सकता है. चूँकि इस कानूनी प्रतिषेध (रोक) बावजूद अम्बाला और सोनीपत में मेयर पद के लिए उपचुनाव कराया गया, इसलिए उसकी कानूनी मान्यता के लिए उक्त धारा में संशोधन करना आवश्यक है.
इसी प्रकार हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 9 (5) का हवाला देते हुए हेमंत ने बताया कि इस धारा में स्पष्ट उल्लेख है कि अगर नगर निगम के रिक्त हुए पद को, जिसका शेष कार्यकाल कम से कम 6 महीने या उससे अधिक हो, को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव मार्फ़त भरा जाना है, तो ऐसा उस पद के रिक्त होने के अधिकतम 2 महीने के भीतर ही किया जा सकता है.
गत वर्ष 8 अक्टूबर 2024 को अम्बाला नगर निगम की तत्कालीन मेयर शक्ति रानी शर्मा के पंचकूला जिले के कालका विधानसभा हलके से भाजपा विधायक बनने और सोनीपत नगर निगम के तत्कालीन मेयर निखिल मदान के सोनीपत विधानसभा हलके से भाजपा विधायक बनने कारण हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 8ए के अंतर्गत अम्बाला और सोनीपत नगर निगमों के मेयर पद उसी दिन से ही रिक्त हो गए थे क्योंकि एक ही समय पर कोई व्यक्ति मेयर एवं साथ साथ विधायक नहीं रह सकता है.
इस प्रकार अगर हरियाणा निर्वाचन आयोग को हरियाणा नगर निगम कानून, 1994 की धारा 13(1) को दरकिनार कर अम्बाला और सोनीपत नगर निगमों में मेयर पद का उपचुनाव कराना ही था, तो ऐसा 8 दिसंबर 2024 से पहले पहले करा लेना चाहिए था, उसके बाद नहीं. अब चूँकि अम्बाला और सोनीपत नगर निगमों के रिक्त मेयर पद उपचुनाव फरवरी-मार्च,2025 में कराया गया, इसलिए ऐसे में उपचुनाव कराने की मौजूदा दो महीने की समय सीमा में कानूनी संशोधन करना आवश्यक है. बहरहाल, अम्बाला और सोनीपत मेयर उपचुनाव को कानूनी मान्यता न मिलने कारण दोनों मेयर द्वारा गत नौ महीनों में किये गए सभी कार्य-कलापों और जारी आदेशों-निर्देशों की वैधता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है.





