
उपायुक्त यशेन्द्र सिंह ने बताया कि रेवाड़ी जिला निक्षय पोषण योजना स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार लाभार्थियों को योजना का लाभ देने में लगातार प्रदेशभर में टॉप पर बना हुआ है। उन्होंने इसके लिए जिलावासियों को बधाई दी है।
उपायुक्त ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2025 तक टीबी मुक्त भारत के सपने को साकार करने की दिशा में जिला रेवाड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की योजना के अनुसार जिला में 1205 टीबी रोगियों की पहचान कर उन्हें मुफ्त ईलाज दिया जा रहा है। योजना के तहत अब तक 27 लाख 58 हजार 500 रुपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। जिला रेवाड़ी का डीबीटी पेड अमाउंट 84 प्रतिशत है।
इस अभियान के नोडल अधिकारी डॉ राजबीर ने बताया कि टीबी मुक्ति के इस अभियान के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा रणनीति बनाकर काम किया जा रहा है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं।
क्या है निक्षय पोषण योजना?
टीबी के कारण देश में हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। दरअसल, टीबी से लड़ने में दवा के अलावा पोषण युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन भी जरूरी है। केन्द्र सरकार द्वारा टीबी (क्षय रोग) से ग्रसित लोगों के लिए शुरू की गई निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत मरीजों को इलाज के लिए प्रतिमाह 500 रुपए की राशि वित्तीय सहायता के रूप में अधिकतम 6 माह तक प्रदान की जाती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए स्वास्थ्य केंद्रों पर पंजीकरण व नामांकन कर सकते हैं।
निक्षय पोषण योजना का उद्देश्य
डॉक्टरों के अनुसार, टीबी होने पर दवाइयों के साथ ही मरीज को पौष्टिक भोजन की भी बहुत जरूरत होती है। इन जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने निक्षय पोषण योजना शुरू किया है। इस योजना के तहत टीबी के मरीजों को केंद्र सरकार द्वारा प्रतिमाह 500 रुपए की धनराशि आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की जाती है। यह अनुदान मरीज के ठीक होने तक दिया जाता है।
निक्षय पोषण योजना की पात्रता
इस योजना का लाभ देश के सिर्फ टीबी से ग्रसित मरीज ही उठा सकते हैं, जो मरीज अधिकारिक निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत होंगे उन्हें ही इस योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। जो लोग पहले से ही टीबी का इलाज करवा रहे हैं वे भी इसके पात्र होंगे। योजना का लाभ लेने के लिए डॉक्टर द्वारा प्रमाणित किए हुए मेडिकल प्रमाण पत्र के अलावा रोगियों को अपना आवेदन पत्र भी जमा करना होगा। साथ ही बैंक अकाउंट पासबुक होना भी जरूरी है।





